Maa Chandraghanta: शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की अराधना की जाती है. मां का ये रूप अधिक ही प्रभावशाली और शक्ति प्रदान करने वाला है. इतना ही नहीं मां चंद्रघंटा की पूजा करने से साहसी, पराक्रमी बनने का फल प्राप्त होता है. देवी चंद्रघंटा का स्वरूप वर्ण- स्वर्ण के समान चमकीला, भव्य है, जिसे देखते ही मन मोहित हो जाए. मां चंद्रघंटा की सवारी सिंह हैं, सिंह पर विराजमान मां अपने भक्तों के हर कष्ट को समाप्त कर देती है.
मां चंद्रघंटा के पूर्ण स्वरूप की बात करें तो उनके मस्तक पर घंटे के आकार की अर्द्धचंद्र सजा है. जिसकी वजह से उनका नाम चंद्रघंटा पड़ा. पुरानी कहावत है कि, मां चंद्रघंटा की अराधना से कुंडली में अगर मंगल दोष बना हुआ है तो वह समाप्त हो जाता है. वहीं मां को अधिक प्रसन्न करने के लिए मां दुर्गा के इस तीसरे रूप की सच्चे मन से पूजा करें. वहीं अराधना के समय आरती, कथा, भोग, लाल पुष्प, मां को चढ़ाएं.
अगर किसी भी व्यक्ति का मंगलग्रह अशुभ है या तो वह अधिक क्रोध करने लगता है, या तो हर बात पर चिड़ जाता है इस प्रकार के लोगों के लिए मां चंद्रघंटा की अराधना अति आवश्यक है. बता दें कि आपका मंगल अगर दूषित है तो व्यक्ति जब भी आगे बढ़ने का प्रयास करता है, उसके रास्ते में किसी न किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न हो जाती है. इसलिए उस व्यक्ति को मां चंद्रघंटा की पूजा करनी चाहिए. जिससे की विशेष फल की प्राप्ति होती है.
अगर आपके जीवन में पैसों की दिक्कत है तो, नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा के सामने उनके मंत्र ‘पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता, प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता का जाप करें.
अगर आप हमेशा किसी बीमारी से ग्रसित रहते हैं तो, इस दिन मां चंद्रघंटा को एक तांबे का सिक्का अथवा लाल फूल चढ़ाएं. इसके साथ ही मां की आरती, भोग करें, और उस सिक्का को अपने पर्स में रख लें. जिससे आपका रोग समाप्त होगा और आरोग्य होने का फल मिलेगा.