UNSC में अमेरिका ने यूक्रेन का छोड़ा साथ, रूस के विरोध में वोट डालने से किया इनकार

UN Security Council: अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र के उस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए, जिसमें यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध में रूस को आक्रमक बताया गया था. ऐसा पहली बार हुए जब अमेरिका ने यूक्रेन के बजाए रूस का साथ दिया है.

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Courtesy: Social Media

UN Security Council: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में अमेरिका ने हमेशा यूक्रेन का साथ दिया है. लेकिन डोनाल्ड ट्रंप की सत्ता में वापसी के बाद अब माहौल बदलता नजर आ रहा है. धीरे-धीरे अमेरिका अब रूस के पक्ष में खड़ा होता नजर आ रहा है. पहले अमेरिका ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की पर समझौता का दबाव डाला था. जिसके बाद अब UN में अमेरिका उस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया, जिसमें रूस के दोषी ठहराया गया था.

संयुक्त राष्ट्र द्वारा पेश किए गए प्रस्तावों में यूरोपीय देशों ने रूसी सेना को यूक्रेन से वापस बुलाने की मांग पर वोट दिया है. वहीं अमेरिका ने यूक्रेन पर हुए हमले के लिए रूस को दोषी ठहराने से पीछे हट गया है. जिसके बाद ग्लोबल वैश्विक में काफी उथल-पुथल मच गई है.

यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ मतदान

UN में सोमवार को रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए तीन प्रस्ताव लाए गए. जिसमें अमेरिका ने सहयोग नहीं दिया है. ऐसा पहली बार हुआ है जब अमेरिका अपने यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ मतदान देते हुए रूस का साथ दिया हो. संयुक्त राष्ट्र द्वारा पेश किए प्रस्ताव में रूस द्वारा किए गए हमले की निंदा की गई थी. साथ ही रूसी सैनिकों को यूक्रेन से तत्काल वापसी की भी बात कही गई थी. लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 15 देशों की टीम में 10 सदस्यों ने पक्ष में मतदान किया वहीं पांच देशों ने मतदान में भाग लेने से परहेज किया. 

संयुक्त राष्ट्र में तीन प्रस्ताव

संयुक्त राष्ट्र में पेश किए गए प्रस्ताव में 111 देशों ने मतदान दिया. जिसमें से 93 देशों ने इसके पक्ष में वोट डाले और वहीं 18 देशों ने इसके खिलाफ मतदान किया है. इसके अलावा 65 देशों ने मतदान में हिस्सा लेने से पूरी तरह से परहेज किया है. संयुक्त राष्ट्र द्वारा पेश किए गए दूसरे प्रस्ताव में युद्ध को समाप्त करने की अपील की गई थी, साथ ही इसमें रूस की आक्रामक घोषित किया गया था. अमेरिका ने इस प्रस्ताव पर होशियारी दिखाते हुए मतदान ही नहीं किया. जिसके बाद यह साफ हो गया कि अमेरिका अब रूस के साथ सीधा पंगा लेने से बिल्कुल बच रहा है. 

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