Donald Trump Reciprocal Tariff : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि उनका प्रशासन जल्द ही भारत और चीन जैसे देशों पर पारस्परिक शुल्क (Reciprocal Tariff) लगाने वाला है. उन्होंने यह बात इससे पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाशिंगटन यात्रा के दौरान भी कही थी.
डोनाल्ड ट्रंप ने वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान कहा कि हम जल्द ही इस शुल्क को शुरु करने वाले हैं. इसका मतलब है कि अगर भारत अमेरिका से कोई टैरिफ लेगा तो अमेरिका भी भारत पर टैरिफ लगाएगा.
अमेरिका राष्ट्रपति ने इस प्रक्रिया को बेहद ही सरल बताया है. उन्होंने कहा कि कोई भी देश चाहे भारत हो या चीन या फिर दुनिया की कोई भी कंपनी अगर हमसे शुल्क लेते हैं तो हम भी उनसे शुल्क लेंगे. हम इस प्रक्रिया में बिल्कुल निष्पक्ष रहना चाहते हैं.
ट्रंप ने कहा कि इस तरीके से अमेरिका द्वारा पहले कोई भी शुल्क नहीं लिया गया, लेकिन इस नियम को लागू करने के लिए अब हम पूरी तरह तैयार हैं. इससे पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमेरिका राष्ट्रपति ने एलन मस्क के साथ बात करते हुए इस बात का खुलासा कर दिया था कि उन्होंने अपनी इस योजना के बारे में भारतीय पीएम को साफ कर दिया है. उन्होंने पीएम मोदी को बता दिया है कि वाशिंगटन के पारस्परिक शुल्क से छूट नहीं मिलेगी.
उन्होंने एलन मस्क से बात करते हुए कहा था कि जब कल भारत के पीएम मोदी यहां थे तो हमने उनसे कहा था कि हम पारस्परिक शुल्क लगाने जा रहे हैं. आप जो भी शुल्क लगाएंगे, मैं भी उतना ही शुल्क लगाऊंगा. जिसपर उन्होंने मजाकिया ढंग में कहा कि टैरिफ कभी उनका पसंदीदा शब्द हुआ करता था. लेकिन अब उन्होंने इस शब्द को परिवार, प्यार और ईश्वर के बाद चौथे नंबर पर रखा है.
प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी बैठक से पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस बात की घोषणा कर दी थी कि वे अपने व्यापारिक साझेदारों पर पारस्परिक शुल्क लगाने वाले हैं. ओवल ऑफिस में अपने इस फैसले पर हस्ताक्षर करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि मैंने निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए पारस्परिक टैरिफ लगाने का फैसला लिया है. ऐसा करना सभी के लिए उचित रहेगा और किसी भी देश को इस पर कोई शिकायत नहीं होनी चाहिए. याद दिला दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान भारत को टैरिफ किंग की उपाधि दी थी. साथ ही उन्होंने अपने देश में भारत की सामान्यीकृत वरीयता प्रणाली यानी GSP को समाप्त कर दिया था.