USAID फंडिंग पर डोनाल्ड ट्रंप का तीखे बयान, कहा-'नई दिल्ली को पैसे की कोई जरूरत नहीं'

डोनाल्ड ट्रंप ने CPAC में अपना भाषण देते हुए एक बार फिर भारत को USAID द्वारा दिए जाने वाले वित्तपोषण को लेकर सवाल उठाया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि नई दिल्ली को पैसे की जरूरत नहीं है.

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Courtesy: Social Media

USAID Funding to India: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से भारत को USAID द्वारा दिए जाने वाले वित्तपोषण को लेकर सवाल उठाया है. उन्होंने चौथी बार इस मुद्दे पर आवाज ऊंचा करते हुए कहा कि नई दिल्ली को पैसे की जरूरत बिल्कुल नहीं है. यह पूरी तरह से अनावश्यक है. 

डोनाल्ड ट्रंप ने कंजर्वेटिव पॉलिटिकल एक्शन कॉन्फ्रेंस में अपना भाषण देते हुए कहा कि हम भारत को उनके देश में चुनाव कराने के लिए पैसे दे रहे हैं, लेकिन उन्हें पैसे की कोई जरूरत नहीं है. भारत दुनिया में सबसे ज्यादा टैरिफ लगाने वाला देशों में शामिल है. उनके पास 200 प्रतिशत टैरिफ है. वे हमारा फायदा उठा रहे हैं. 

भारत को बताया टैरिफ किंग

USAID द्वारा दिए जाने वाले वित्तपोषण राशि को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी सरकारी दक्षता विभाग यानी DoGE ने अमेरिका द्वारा विभिन्न देशों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता को कम करने का फैसला लिया. जिसमें यह बात सामने आई की भारत में चुनाव कराने के लिए DoGE द्वारा 21 मिलियन डॉलर की धनराशि आवंटित की गई थी.

इससे पहले भी अपने पहले कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने भारत को टैरिफ किंग बताया था. उन्होंने भारत के उच्च टैरिफ दरों को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए भारत पर व्यापारिक अनुबंधों का बड़ा दुरुपयोग करने का आरोप लगाया था. जिसके कारण अपने दूसरे कार्यकाल के पहले मीटिंग में उन्होंने पीएम मोदी से यह साफ कर दिया कि अमेरिका भी अब सभी देशों पर पारस्परिक टैरिफ लगाने वाला है. 

ट्रंप के बयानों पर भारत में हलचल तेज 

ट्रंप सरकार ने  USAID द्वारा दिए जाने वाले वित्तपोषण को जल्द से जल्द बंद करने की प्रक्रिया तेज कर दी है. उन्होंने इस कार्यक्रम को अनुकूल नहीं बताया और ऐसी एजेंसियों के काम को व्यर्थ बताया है. हालांकि ट्रंप के बयानों पर भारत की सख्त प्रतिक्रिया सामने आई है. भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूएसएआईडी फंडिंग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह एजेंसी केवल सद्भावना के लिए काम कर रही थी, न कि किसी दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य से काम किया जा रहा था.

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह एक गंभीर मामला है और अगर इसमें कुछ भी गलत है तो देश को इसके बारे में पता होना चाहिए. हालांकि कुछ रिपोर्ट में यह भी बात कही जा रही है कि यह 21 मिलियन डॉलर वाली राशि भारत नहीं बल्कि बांग्लादेश के लिए था. हालांकि विदेश में चल रहे इस हलचल का असर अब भारत में भी होना शुरू हो गया है. राजनीतिक पार्टियों ने आपस में आरोप-प्रत्यारोप लगाना शुरू कर दिया है. 

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