ट्रंप प्रशासन की हिरासत में भारतीय छात्र, हमास के समर्थन में अमेरिका में कर रहा था प्रचार

बदर खान सूरी के वकील ने मामले की जानकारी देते हुए कहा कि ट्रंप सरकार के प्रशासन द्वारा सूरी को हमास के समर्थन में पोस्ट करने की हरकत को अमेरिकी विदेश नीति के लिए हानिकारक बताया गया है. जिसके कारण उन्हें निर्वासित करने की कोशिश की जा रही है. 

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Courtesy: Social Media

Badar Khan Suri: अमेरिका में रहने वाले भारतीय छात्र के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप सरकार के प्रशासन ने एक्शन लिया है. मिल रही जानकारी के मुताबिक वाशिंगटन के जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले भारतीय छात्र बदर खान सूरी को फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह हमास के साथ कनेक्शन और सोशल मीडिया पर उसके प्रचार के आरोप में हिरासत में लिया गया है.

बदर खान सूरी के वकील ने मामले की जानकारी देते हुए कहा कि ट्रंप सरकार के प्रशासन द्वारा सूरी के इस हरकत को अमेरिकी विदेश नीति के लिए हानिकारक बताया गया है. जिसके कारण उन्हें निर्वासित करने की कोशिश की जा रही है. 

क्या है अमेरिकी प्रशासन का आरोप?

भारतीय छात्र बदर खान सूरी के वकील ने कहा कि उसे लुइसियाना के अलेक्जेंड्रिया में हिरासत में लिया गया है. जिसके बाद वह इमिग्रेशन कोर्ट में कोर्ट की तारीख का इंतजार कर रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि सूरी को सोमवार रात वर्जीनिया के रॉसलिन में उसके घर के बाहर संघीय एजेंटों ने गिरफ्तार किया था. व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर द्वारा दोबारा पोस्ट किए गए बयान में भारतीय छात्र के खिलाफ अपने आरोपों के लिए सबूत नहीं दिए गए. इसमें यह भी कहा गया कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने निर्धारित किया कि सूरी की गतिविधियों ने उसे निर्वासित करने योग्य बना दिया. जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के छात्र पर सोशल मीडिया पर यहूदी विरोधी भावना फैलाने का भी आरोप लगा रहे हैं. 

कौन है बदर खान सूरी?

बदर खान सूरी छात्र वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं. हालांकि उन्होंने अमेरिकी नागरिक मफेजे सालेह से शादी कर ली है. वह जॉर्जटाउन के अलवलीद बिन तलाल सेंटर फॉर मुस्लिम-क्रिस्चियन अंडरस्टैंडिंग में पोस्टडॉक्टरल फेलो हैं. जो विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ फॉरेन सर्विस का भी हिस्सा है.जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय की वेबसाइट के अनुसार मफेजे सालेह गाजा से हैं और उन्होंने कतर सरकार द्वारा वित्तपोषित प्रसारक अल जजीरा और फिलिस्तीनी मीडिया आउटलेट्स के लिए लिखा है. उन्होंने युद्ध से तबाह पट्टी में विदेश मंत्रालय के साथ भी काम किया है.

सूरी ने एक भारतीय विश्वविद्यालय जामिया मिलिया इस्लामिया से शांति और संघर्ष अध्ययन में पीएचडी की है. इस सेमेस्टर में दक्षिण एशिया में बहुसंख्यकवाद और अल्पसंख्यक अधिकार पर एक कक्षा पढ़ा रहे हैं. ट्रंप प्रशासन ने आरोप लगाया है कि फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनकारी यहूदी विरोधी हैं. इस तरह की जांच के तहत आने वाले संस्थानों में कोलंबिया विश्वविद्यालय, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले; मिनेसोटा विश्वविद्यालय, नॉर्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय और पोर्टलैंड स्टेट यूनिवर्सिटी शामिल हैं.

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