नई दिल्ली: बांगलादेश में हाल ही में हुए प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों ने अवामी लीग पार्टी के नेताओं के घरों को निशाना बनाया और देश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान के स्मारकों को नुकसान पहुंचाया. इस दौरान ढाका में हुई हिंसक घटनाओं ने देश में राजनीतिक हलचल को और बढ़ा दिया.
सोशल मीडिया पर "बुलडोजर जुलूस" के आह्वान के बाद ढाका के धानमंडी इलाके में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्र हुए. उन्होंने शेख मुजीबुर रहमान के आवास और उनके भित्तिचित्रों को क्षतिग्रस्त किया. प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान तोड़फोड़ और आगजनी की, जबकि बांगलादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने डिजिटल रूप से संबोधन देने का प्रयास किया. हसीना ने प्रदर्शनकारियों को कड़ी चेतावनी दी और कहा, "वे एक इमारत को ध्वस्त कर सकते हैं, लेकिन इतिहास को नहीं, क्योंकि इतिहास अपना बदला जरूर लेता है."
ढाका में हुई घटनाओं के बाद, बांगलादेश के अन्य हिस्सों में भी हिंसक प्रदर्शन देखे गए. प्रदर्शनकारियों ने खुलना शहर में हसीना के रिश्तेदारों के घरों में तोड़फोड़ की. इसके साथ ही उन्होंने “दिल्ली या ढाका-ढाका, ढाका” और “मुजीबवाद मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए. इसके अलावा, चटगांव में हसीना के खिलाफ मशाल जुलूस भी निकाला गया, और वहां के जमाल खान इलाके में मुजीबुर रहमान के भित्तिचित्रों को विरूपित किया गया.
The last trace of the architect of independent Bangladesh has been burned to ashes today.
— taslima nasreen (@taslimanasreen) February 5, 2025
Cry, Bangladesh, cry. pic.twitter.com/lj17JJ4IzJ
कुश्तिया में अवामी लीग के नेताओं के घरों में तोड़फोड़ की गई और सिलहट में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया. इनमें ‘स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन’ संगठन के छात्र भी शामिल थे, जिन्होंने हसीना के संबोधन के खिलाफ रैली निकाली.
बांगलादेश में इन घटनाओं ने राजनीतिक संकट को और भी गहरा दिया है. शेख हसीना के संबोधन के बाद, देश के कई क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों का उग्र रूप देखने को मिला. वहीं, प्रदर्शनकारियों ने शेख मुजीबुर रहमान के भित्तिचित्रों को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ कई अन्य महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों को भी निशाना बनाया.
बांगलादेश में हाल के दिनों में हुए इन हिंसक प्रदर्शनों ने देश की राजनीति और समाज में बड़ा असंतोष और अशांति पैदा कर दी है. यह घटनाएं बांगलादेश के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकती हैं, क्योंकि देश में शांति और लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए राजनीतिक स्थिरता की आवश्यकता है.
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