Super Volcano: जानें क्या है सुपर वोल्केनो, पूरी दुनिया में क्यों हो रही है चर्चा

Super Volcano: इन दिनों हर जगह सुपर वोल्केनो की चर्चा हो रही है. हर कोई यही जानना चाहता है कि आखिर ज्वालामुखी कैसे बनते हैं और ये इतना खतरनाक क्यों है.

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Super Volcano: आज कल हर जगह सुपर वोल्केनो की चर्चा हो रही है. सोशल मीडिया हो या आपस की बातचीत हर जगह लोग सुपर वोल्केनो से घबराये हुए हैं. हर कोई जानना चाहता है कि आखिर ये कितना खतरनाक है. खास तौर पर इटली में रहने  लोग इस सुपर वोल्केनो नामक ज्वालामुखी से सबसे ज्यादा डरे हुए हैं. तो आइये जानते हैं कैसे बनते हैं ज्वालामुखी और क्या है सुपर वोल्केनो 

 

क्या है सुपर वोल्केनो 

दरअसल ज्वालामुखी एक तरह का पहाड़ होता है. लेकिन इस पहाड़ के नीचे ढेर सारा पिघला हुआ लावा होता है. बता दें कि पृथ्वी के भीतर जियोथर्मल एनर्जी भारी मात्रा में होती है. और यही वजह है लावा बनने की. पृथ्वी के भीतर मौजूद जियोथर्मल एनर्जी के कारण पत्थर पिघल कर लावा में बदल जाता है. 

बता दें कि जिसे दुनिया सुपर वॉलकैनो कह रही है दरअसल उसका असली नाम कैम्पी फ्लेग्रेरी है. चिंता की बात ये है कि ये ज्वालामुखी दुनिया के 20 सबसे ज्यादा सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है. जानकारी के मुताबिक  कैम्पी फ्लेग्रेरी लगभग 12 से 15 किलोमीटर के एरिया में फैला हुआ है. और इस ज्वालामुखी के फटने से करीब 200 किलोमीटर के अंतर्गत का क्षेत्र प्रभावित होगा. 


कैसे बनते है सुपर वॉलकैनो 

कोई भी ज्वालामुखी सुपर वोल्केनो तब बनता है जब एक ही जगह पर 240 घन मील से अधिक सामग्री में विस्फोट हुआ हो. गौरतलब है कि इटली के कैम्पी फ्लेग्रेरी के साथ ऐसा ही हुआ है. यही कारण है कि इसे सुपर वॉलकैनो कहा जा रहा है. जानकारी के अनुसार, साल 1538 में आखिरी बार इस तरह का  ज्वालामुखी विस्फोट में हुआ था. तब ये विस्फोट इतना खतरनाक था कि इसकी वजह से नेपल्स की खाड़ी में एक नया पहाड़ बन गया था.

 

कब फटते हैं ज्वालामुखी 

दरअसल ज्वालामुखी एक तरह का पहाड़ होता है जिसके नीचे ढेर सारा पिघला हुआ लावा होता है और पृथ्वी के भीतर जियोथर्मल एनर्जी भारी मात्रा में होती है. इस एनर्जी के कारण ही पत्थर पिघल कर लावा में बदल जाता है. बाद में यही लावा जब ऊपर की ओर दबाव बनाता है तो पहाड़ फट जाता है और वह ज्वालामुखी कहलाता है. अगर इसे वैज्ञानिक कारणों की बात करें तो पृथ्वी के भीतर जब टेक्टोनिक प्लेट्स में आपस में जब घर्षण होती है तो उससे  होने वाली एनर्जी से पत्थर पिघलने लगते हैं, फिर यही पिघले हुए पत्थर और गैस ऊपर की और दबाव पैदा करते हैं जिससे पहाड़ फट जाता है और ज्वालामुखी में बदल जाता है.