'RSS की ड्रेस में नीतीश, गिरगिट से तुलना ', वक्फ संशोधन बिल पर बिहार में राजनीतिक घमासान

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने पोस्टर के माध्यम से वक्फ संशोधन विधेयक पर सीएम नीतीश की रुख की आलोचना की है. विपक्षी पार्टी द्वारा उनकी तुलना एक 'गिरगिट' से भी की गई है. जिसमें दावा किया गया है कि कुमार उससे भी तेजी से अपने 'रंग' बदले हैं.

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Courtesy: Social Media

Nitish Kumar Posters: वक्फ संशोधन विधेयक का असर बिहार की राजनीति में दिखने लगा है. बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू नेता नीतीश कुमार ने संसद में इस बिल का समर्थन किया, जिसके बाद राज्य में विरोधी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने उनपर हमला करते हुए नया पोस्टर शेयर किया है. 

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने पोस्टर के माध्यम से वक्फ संशोधन विधेयक पर उनके रुख की आलोचना की है. विपक्षी पार्टी द्वारा उनकी तुलना एक 'गिरगिट' से भी की गई है. जिसमें दावा किया गया है कि कुमार उससे भी तेजी से अपने 'रंग' बदले हैं.

'इफ्तार' की मेजबानी की आड़ में धोखा

बिहार के चौक-चौराहे पर राजद द्वारा लगवाए गए नए पोस्टर में कुमार को नमाज़ अदा करते समय मुसलमानों द्वारा पहनी जाने वाली टोपी में भी दिखाया गया है. इसमें कहा गया है कि जेडीयू ने 'इफ्तार' की मेजबानी की आड़ में समुदाय को धोखा दिया. कथित तौर पर यह पोस्टर आरजेडी नेता आरिफ जिलानी द्वारा पूर्व सीएम और आरजेडी नेता राबड़ी देवी के आवास के सामने लगाया गया था. एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में, आरजेडी ने बिहार के सीएम को 'धोखेबाज कुमार' करार दिया. उनकी छवि को फोटोशॉप किया और उन्हें आरएसएस कार्यकर्ता के रूप में चित्रित किया.

मुसलमानों को टूटा विश्वास

पोस्टर राज्यसभा और लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक (2025) के पारित होने की पृष्ठभूमि में आए हैं. विधेयक को उच्च सदन में 128 मतों से तथा निचले सदन में 288 मतों से पारित किया गया. इससे पहले जदयू अल्पसंख्यक प्रदेश सचिव शाह नवाज मलिक ने वक्फ विधेयक को लेकर पार्टी के रुख के कारण पार्टी तथा अन्य पदों से इस्तीफा दे दिया था.

उनके त्यागपत्र में लिखा था कि हमारे जैसे लाखों भारतीय मुसलमानों को अटूट विश्वास था कि आप विशुद्ध धर्मनिरपेक्ष विचारधारा के ध्वजवाहक हैं. लेकिन अब यह विश्वास टूट चुका है. हमारे जैसे लाखों समर्पित भारतीय मुसलमान तथा कार्यकर्ता वक्फ विधेयक संशोधन अधिनियम 2024 को लेकर जदयू के रुख से गहरे सदमे में हैं. एनडीए के नेतृत्व वाली केंद्र की अन्य सहयोगी पार्टियों की तरह जदयू ने भी संसद में विवादास्पद विधेयक का समर्थन किया. 

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