Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणी पर रोक लगा दी है. उच्च न्यायालय ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश में की गई टिप्पणियों पर रोक लगा दी, जिसमें कहा गया था कि केवल स्तन पकड़ना और 'पजामा' की डोरी खींचना बलात्कार का अपराध नहीं है.
न्यायमूर्ति बीआर गवई और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि यह कहना दुखद है कि उच्च न्यायालय के आदेश में की गई कुछ टिप्पणियों में पूरी तरह से 'असंवेदनशीलता' और 'अमानवीय दृष्टिकोण' दर्शाया गया है.
पीठ ने केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य को नोटिस जारी कर उच्च न्यायालय के 17 मार्च (सोमवार) के आदेश पर शुरू की गई स्वत: संज्ञान कार्यवाही में उनकी प्रतिक्रिया मांगी है. सर्वोच्च न्यायालय ने विवादास्पद आदेश पर स्वत: संज्ञान लिया है. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 17 मार्च को फैसला सुनाया कि केवल स्तन पकड़ना और 'पजामा' की डोरी खींचना बलात्कार के अपराध की श्रेणी में नहीं आता है. बल्कि ऐसा अपराध किसी महिला के खिलाफ हमला या आपराधिक बल का प्रयोग करने के दायरे में आता है. जिसका उद्देश्य उसे निर्वस्त्र करना या नग्न होने के लिए मजबूर करना है.
जानकारी के मुताबिक पॉक्सो अधिनियम की अदालत के समक्ष एक आवेदन पेश किया गया था. जिसमें आरोप लगाया गया था कि 10 नवंबर, 2021 को शाम करीब 5:00 बजे, वह (सूचनाकर्ता) अपनी भाभी (पति की बहन) के घर से अपनी लगभग 14 वर्षीय नाबालिग बेटी के साथ लौट रही थी. इसी दौरान आरोपी पवन, आकाश और अशोक (उसके गांव के रहने वाले) रास्ते में मिलें और उनसे बात करने लगे. इसी दौरान उसने लिफ्ट देनी की पेशकश की.
महिला उसपर भरोसा करते हुए उसकी बाइक पर बैठ गई. जिसके बाद बीच रास्ते में व्यक्ति ने बाइक रोकी और महिला के ब्रेस्ट को पकड़ना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे बदतमीजी बढ़ गई और उस व्यक्ति ने पायजामे का नाड़ा खींच लिया. हालांकि बच्ची की चिल्लाने की आवाज सुनकर वहां पर लोग जुट गए. हालांकि आरोपी ने पिस्तौल दिखाकर लोगों को डराने की कोशिश की, लकिन लोगों ने उसे खदेड़ दिया. जिसके बाद यह मामला अदालत में पहुंच गया.