Business News: सैनफोर्ड सी बर्नस्टीन की रिपोर्ट मुताबिक अरबपति मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज 2030 तक सौर ऊर्जा से लेकर हाइड्रोजन तक फैले अपने नए ऊर्जा कारोबार से 10-15 बिलियन अमरीकी डालर कमा सकती है। हालांकि, उसे प्रौद्योगिकी में अपनी सीमित विशेषज्ञता की भरपाई नए अधिग्रहणों या भागीदारी के जरिये करनी होगी।
स्वच्छ ऊर्जा (सौर, बैटरी, इलेक्ट्रोलाइज़र और ईंधन सेल) 2050 तक भारत में 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश के साथ रिलायंस के लिए एक नए विकास स्तंभ का प्रतिनिधित्व करती है। भारत 2030 तक 280GW की सौर क्षमता और 5 मिलियन टन ग्रीन H2 उत्पादन का लक्ष्य बना रहा है।
ब्रोकरेज कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “हमारा अनुमान है कि यात्री और वाणिज्यिक वाहन श्रेणी में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या पांच प्रतिशत पर पहुंचेगी, जबकि दोपहिया वाहनों के मामले में यह 21 प्रतिशत होगी। स्वच्छ ऊर्जा का कुल उपलब्ध बाजार (TAM) मौजूदा के 10 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 में 30 अरब डॉलर का हो सकता है।”
तेल से लेकर दूरसंचार क्षेत्र तक काम कर रहे रिलायंस समूह ने सौर विनिर्माण के साथ-साथ हाइड्रोजन बाजार में उतरने की घोषणा की है। रिलायंस की योजना 2030 तक 100 GW की स्थापित सौर क्षमता पाने की है, जो देश की लक्षित क्षमता 280 GW का 35% है।
बर्नस्टीन ने कहा, “हमें रिलायंस के 2030 तक सौर बाजार का 60 %, बैटरी बाजार का 30 % और हाइड्रोजन बाजार का 20 % हासिल करने की उम्मीद है।’’
रिपोर्ट के अनुसार, “हमारा अनुमान है कि रिलायंस 2030 में नए ऊर्जा कारोबार से लगभग 10-15 अरब डॉलर का राजस्व प्राप्त कर सकती है जो टीएएम का लगभग 40 % बैठेगा।”