क्रिप्टो फ्रॉड केस को लेकर देश में CBI की 60 जगहों में छापेमारी

15 फरवरी 2025 को, CBI ने दिल्ली और हरियाणा में 11 ठिकानों पर छापा मारा था. इस कारवाई में CBI को 1.08 करोड़ रुपए नगद, 1000 अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा, 252 ग्राम सोना, छह लैपटॉप, आठ मोबाइल फोन और एक आईपैड बरामद हुआ था.

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Courtesy: social media

15 फरवरी 2025 को, CBI ने दिल्ली और हरियाणा में 11 ठिकानों पर छापा मारा था. इस कारवाई में CBI को 1.08 करोड़ रुपए नगद, 1000 अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा, 252 ग्राम सोना, छह लैपटॉप, आठ मोबाइल फोन और एक आईपैड बरामद हुआ था.

सीबीआई ने क्रिप्टोकरेंसी फ्रांड से जुड़े मामलों में 60 जगहों पर छापे मारे हैं. जिसमें दिल्ली एनसीआर, पुणे, नांदेड़, चंडीगड़, कोलहापुर और बैंगलुरु जैसे अन्य कई शहर शामिल हैं. इस घोटाले के मास्टरमाइंड फर्जी वेबसाइट और ऑनलइन धोखाधड़ी के जरीए लोगों को ठगते थे.  आरोपियों ने फेमस क्रिप्टो एक्सचेंज प्लेटफॉर्म की नकल करके लोगों को ठगा.

कैसे हुआ घोटाला

यह धोखाधड़ी 2015 में शुरू हुई थी, जब  अमित भारद्वाज (मृतक), अजय भारद्वाज और उनके एजेंट ने साथ मिलकर एक समूह के रुप में काम किया था. गेनबिटकॉइन समूह में कई डुप्लिकेट साइटें डिज़ाइन की गईं और लोगों को पोंजी धोखाधड़ी के तहत निवेश करने के लिए आकर्षित किया गया. इन सभी साइटों के कार्य की पहचान वैरिएबलटेक पीटीई लिमिटेड कंपनी के नाम से की गई थी.

वादा किया गया रिटर्न क्या था?

प्रोटोटाइप के पीछे के दिमाग, अमित भारद्वाज (अब मृत) और अजय देवगन ने 18 महीने तक गाजर में पैसे कमाने के लिए डायनासोर को धोखा दिया. इनाम के तौर पर उन्हें हर महीने 10% रिटर्न की छूट मिली. गेनबिटकॉइन के जरिए कारोबार को क्रिप्टो इक्विटी शेयर और क्लाउड माइनिंग कॉन्ट्रैक्ट के जरिए निवेश के लिए प्रेरित किया गया.

यूनिट में रिटर्न मिलना शुरू हुआ

फैकल्टी ने बताया कि पहले चरण के दौरान आवेदकों के वादे वापस आए, जिससे लोगों का भरोसा बढ़ा. लेकिन 2017 में जब नए निवेशक कम होने लगे तो स्कीम जारी कर दी गई. घाटे की भरपाई के लिए चारों ने कबाड़ गोदाम को अपने इन-हाउस MCAP में बदल दिया, जो असल कीमत से काफी कम था.

देशभर में दर्ज हुई एफआईआर

इस कंपनी में धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में कई एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं. घोटाले के व्यापक असर को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर, पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों में दर्ज मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी थी.

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