इंजीनियर रशीद की जमानत याचिका का शीघ्र निपटारा करें: दिल्ली उच्च न्यायालय

नई दिल्ली :  दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के मामलों की सुनवाई करने वाली अदालत से आग्रह किया कि वह जम्मू और कश्मीर के सांसद अब्दुल रशीद शेख उर्फ ​​इंजीनियर रशीद की जमानत याचिका पर जल्द फैसला करे. रशीद को आतंकवाद के वित्तपोषण के मामले में जेल में बंद किया गया है. 

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Courtesy: social media

नई दिल्ली :  दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के मामलों की सुनवाई करने वाली अदालत से आग्रह किया कि वह जम्मू और कश्मीर के सांसद अब्दुल रशीद शेख उर्फ ​​इंजीनियर रशीद की जमानत याचिका पर जल्द फैसला करे. रशीद को आतंकवाद के वित्तपोषण के मामले में जेल में बंद किया गया है. 

जमानत याचिका पर अदालत ने दिया आदेश

दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विकास महाजन ने कहा, "पटियाला हाउस अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश से अनुरोध है कि याचिकाकर्ता की जमानत याचिका का शीघ्र निपटारा किया जाए." अदालत इस समय रशीद द्वारा दायर की गई उस याचिका पर विचार कर रही थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि संसद सदस्य बनने के बाद एनआईए अदालत ने उनकी जमानत याचिका पर कोई निर्णय नहीं लिया और उन्हें राहत प्राप्त करने का कोई रास्ता नहीं बचा. 

न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देश

न्यायमूर्ति महाजन ने स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय का आदेश था कि एनआईए अदालत मामले की सुनवाई जारी रखेगी. इसके बाद, रशीद के वकील ने उच्च न्यायालय से याचिका वापस लेने की अपील की. 

आतंकी वित्तपोषण के आरोप

बारामूला से सांसद रशीद पर आतंकी वित्तपोषण के मामले में मुकदमा चल रहा है, जिसमें आरोप है कि उन्होंने जम्मू और कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकी समूहों को धन मुहैया कराया. रशीद को 2019 में तिहाड़ जेल भेजा गया था, जब एनआईए ने उन्हें 2017 के आतंकी वित्तपोषण मामले में गिरफ्तार किया था. 

लोकसभा चुनाव में जीत और पैरोल

रशीद 2024 के लोकसभा चुनाव में बारामूला निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे, लेकिन 2019 से वे तिहाड़ जेल में बंद हैं. अदालत ने रशीद को संसद सत्र में भाग लेने के लिए 11 और 13 फरवरी को दो दिन की हिरासत पैरोल की अनुमति दी थी. 

यह मामला न्यायालय में चल रहा है और रशीद की जमानत याचिका का निर्णय जल्द ही लिया जाएगा. इसके साथ ही, रशीद और उनके समर्थक उम्मीद कर रहे हैं कि उच्च न्यायालय का आदेश उन्हें न्याय मिलेगा.
 

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