न्यू इंडिया सहकारी बैंक के पूर्व सीईओ पर धोखाधड़ी का आरोप, गिरफ्तारी

मुंबई :  मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने न्यू इंडिया सहकारी बैंक के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अभिमन्यु भोआन को 122 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार कर लिया है. यह गिरफ्तारी बैंक के भीतर लंबे समय से चल रहे इस घोटाले की जांच में तीसरी बड़ी कार्रवाई है.

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Courtesy: social media

मुंबई :  मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने न्यू इंडिया सहकारी बैंक के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अभिमन्यु भोआन को 122 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार कर लिया है. यह गिरफ्तारी बैंक के भीतर लंबे समय से चल रहे इस घोटाले की जांच में तीसरी बड़ी कार्रवाई है.

तीसरी बड़ी गिरफ्तारी: पहले भी हुई थी गिरफ्तारी

ईओडब्ल्यू के अधिकारियों के अनुसार, अभिमन्यु भोआन की गिरफ्तारी इस मामले में तीसरी बड़ी गिरफ्तारी है. इससे पहले, बैंक के तत्कालीन महाप्रबंधक हितेश मेहता को गिरफ्तार किया गया था. उन पर आरोप है कि उन्होंने बैंक के खजाने से 122 करोड़ रुपये की हेराफेरी की. जांच में यह भी सामने आया है कि कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस घोटाले में शामिल हो सकते हैं.

बैंक घोटाले का खुलासा: फर्जी दस्तावेज और बैंकिंग प्रक्रियाओं का उल्लंघन

पुलिस जांच में यह पता चला है कि यह घोटाला फर्जी दस्तावेजों और बैंकिंग प्रक्रियाओं का उल्लंघन कर अंजाम दिया गया था. बैंक के भीतर के अधिकारियों ने नकली लेनदेन दिखाकर भारी धनराशि का दुरुपयोग किया. फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बैंक के रिकॉर्ड में कई खामियां थीं, जिन्हें लंबे समय तक छिपाया गया था.

आगे की जांच और गिरफ्तारियों की संभावना

ईओडब्ल्यू के अधिकारी इस पूरे मामले की गहरी जांच कर रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या अन्य बैंक अधिकारी भी इस गबन में शामिल थे. पुलिस ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में और संदिग्धों की गिरफ्तारी हो सकती है. 

सहकारी बैंकों पर बढ़ी निगरानी

यह धोखाधड़ी सहकारी बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है. विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और अन्य नियामक संस्थाएं इस मामले को लेकर कड़े कदम उठा सकती हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.

वित्तीय विशेषज्ञों की राय

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के घोटाले केवल एक-दो लोगों की साजिश नहीं होते, बल्कि यह पूरे बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियों को उजागर करते हैं. एक वरिष्ठ बैंकिंग विश्लेषक ने कहा, "यह मामला सिस्टम की लापरवाही और पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है, जिसे सुधारने की जरूरत है."

अब क्या होगा?

इस मामले में अब कानूनी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और पुलिस द्वारा सभी संबंधित सबूत अदालत में पेश किए जाएंगे. अभिमन्यु भोआन और हितेश मेहता पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, और सरकारी नियमों के उल्लंघन के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि बैंकिंग नियामक संस्थाओं से मदद ली जाएगी.

यह घोटाला सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक बड़ा झटका है, जिसने आम जनता के विश्वास को प्रभावित किया है. यह देखना बाकी है कि न्यायालय और नियामक संस्थाएं इस मामले में क्या कदम उठाती हैं और क्या अन्य सहकारी बैंकों की वित्तीय गतिविधियों की जांच तेज होगी.

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