JDU Leaders Resign: देश में वक्फ संशोधन बिल को लेकर लगातार चर्चा जारी है. हालांकि अब इस बिल को दोनों सदनों से पास करा लिया गया है. लेकिन इसे पास कराने में मोदी सरकार के दो अनमोल रत्नों ने अपना अहम योगदान दिया है.
मोदी 3.O की सरकार बनाने में और अब ऐसे महत्वपूर्ण बिल के संशोधन में भी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू और चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी ने अपना अहम योगदान दिया है. हालांकि इस अहम योगदान की वजह से जेडीयू को भारी नुकसान उठाना पड़ा.
बिहार में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होना है. जिसे लेकर राज्य में पहले से ही राजनीतिक घमासान मचा हुआ है. इसी बीच वक्फ संशोधन विधेयक की वजह से जेडीयू के दो विधायकों ने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया. जेडीयू के वरिष्ठ नेता मोहम्मद कासिम अंसारी और पार्टी के अल्पसंख्यक प्रदेश सचिव मोहम्मद नवाज मलिक ने सीएम नीतीश को पत्र लिखकर कहा है कि उनकी पार्टी से मुसलमान समुदाय का भरोसा उठ गया है. इस पार्टी को वे कभी धर्मनिरपेक्षता की मिसाल मानते थे.
सीएम नीतीश को लिखे पत्र में मलिक ने कहा कि हमारे जैसे लाखों भारतीय मुसलमानों को अटूट विश्वास था कि आप पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष विचारधारा के ध्वजवाहक हैं. लेकिन अब यह विश्वास टूट गया है. हमारे जैसे लाखों समर्पित भारतीय मुसलमान और कार्यकर्ता वक्फ विधेयक संशोधन अधिनियम 2024 के बारे में जेडीयू के रुख से बहुत सदमे में हैं. अंसारी ने अपने पत्र में विधेयक को भारतीय मुसलमानों के खिलाफ बताया और इसे किसी भी परिस्थिति में खारिज करने को कहा है.
उन्होंने कहा कि यह विधेयक संविधान के कई मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है. इस विधेयक के माध्यम से भारतीय मुसलमानों को अपमानित किया जा रहा है. इस बात का एहसास न तो आपको और न ही आपकी पार्टी को है. उन्होंने आगे लिखा कि मुझे खेद है कि मैंने अपने जीवन के कई साल पार्टी को दिए. जेडी(यू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने दोनों के इस्तीफों को खारिज करते हुए दावा किया कि न तो अंसारी और न ही मलिक पार्टी के आधिकारिक ढांचे का हिस्सा थे.
वक्फ संशोधन बिल को लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी पारित कर दिया गया है. जिसके बाद अब इस विधेयक को राष्ट्रपति द्रौपदी के समक्ष पेश किया जाएगा. इस पर मंजूरी मिलने के बाद इसे कानून का रूप दिया जाएगा. इस बिल के पक्ष में लोकसभा 288 वोट प्राप्त हुए, वहीं विरोध में 232 सांसदों ने अपना मतदान डाला. वहीं राज्यसभा में इस विधेयक के पक्ष में 128 और विरुद्ध में 95 मत मिले. केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने इस बिल को पेश करते हुए कहा कि प्रस्तावित कानून मुसलमानों के खिलाफ नहीं है और ना ही यह उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा रखता है. उन्होंने दावा किया कि इस विधेयक का उद्देश्य पिछली सरकारों के अधूरे कार्यों को पूरा करना है.