बंद कमरें में धू-धू कर जलता नोटों का बंडल, जस्टिस यशवंत वर्मा ने इन्हें अपनाने से किया इंकार

दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के घर जलते नोटों के बंडल का माला काफी सुर्खियों में हैं. हालांकि उन्होंने इसे मानने से पूरी तरह इंकार किया है. लेकिन उसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर काफी तेजी से शेयर किया जा रहा है, जिसमें कमरे के अंदर नोटों का जलता बंडल नजर आ रहा है.

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Courtesy: Social Media

Justice Yashwant Verma: सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के घर नकदी बरामदगी की जांच रिपोर्ट जारी करने का आदेश दिया गया. साध ही दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पर दिल्ली पुलिस कमिश्नर की जांच का हवाला देते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) से विस्तृत जांच शुरू करने का आग्रह किया है.

वहीं इस मामले में जस्टिस वर्मा ने अपने उपर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया है. साथ ही उन्होंने कहा है कि ये उन्हें बदनाम करने की साजिश है. उन्होंने यह भी दावा किया कि जिस कमरे में नकदी मिली थी, वहां हर कोई जा सकता था. जिसमें उनके कर्मचारी, माली और यहां तक ​​कि केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के कर्मचारी भी शामिल थे.

क्या है पूरा मामला?

 न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि पुलिस आयुक्त ने  अपनी रिपोर्ट में बताया है कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आवास पर जिस कमरे में आग लगी थी, वहां सभी के जाने की अनुमति नहीं है. उन्होंने अपने रिपोर्ट में बताया कि वर्मा के आवास पर तैनात गार्ड और अन्य कर्मचारियों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक इस कमरे में केवल वही लोग जा सकते थे, जिन्हें जस्टिस वर्मा अनुमति देते थे. हालांकि पुलिस आयुक्त के इस ब्यान को और जारी की वीडियो पर वर्मा ने हैरानी जताई है. साथ ही उन्होंने यह साफ कहा कि यह सारा खेल उन्हें फंसाने और बदनाम करने की कोशिश से की जा रही है. उन्होंने् कहा कि घर के स्टोररूम में कभी भी कोई नकदी नहीं रखी गई. उन्होंने कहा कि उस कमरे में मेरे परिवार ने भी कभी कोई नकदी नहीं रखी. 

जस्टिस वर्मा की सफाई

जस्टिस वर्मा ने दिल्ली के मुख्य न्यायाधीश को दिए अपने जवाब में कहा कि मैं यह बात साफ कर देना चाहता हूं कि मेरे घर से किसी ने भी कमरे में जली हुई मुद्रा देखने की सूचना नहीं दी है. वास्तव में यह इस बात से और पुष्ट होता है कि जब अग्निशमन कर्मियों और पुलिस के घटनास्थल से चले जाने के बाद हमें साइट वापस की गई तो वहां कोई नकदी या मुद्रा नहीं थी, सिवाय इसके कि हमें मौके पर की गई किसी भी बरामदगी या जब्ती के बारे में सूचित नहीं किया गया. वहीं इस मामले पर संजीव खन्ना ने वर्मा के खिलफ आरोपों की आंतरिक जांच करने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है. हालांकि इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हो रहा है. जिसमें कमरे के अंदर रूपयों का बंडल जलता नजर आ रहा है.

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