'PM मोदी के रिटायरमेंट का समय नजदीक...', जंगल सफारी करने पर बोले संजय राउत

Sanjay Raut: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय दौरे पर गुजरात पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने गिर वन्यजीव अभ्यारण्य और वनतारा जैसे जगहों पर जाकर जानवरों के साथ कुछ समय बिताया. उन्होंने अपने इस दौरे की कुछ तस्वीरें और वीडियो भी शेयर किया था. जिसके बाद विपक्षी नेता राउत ने तंज कसा है. 

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Courtesy: Social Media

Sanjay Raut: शिवसेना सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात दौरे पर तंज कसा है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी का रिटायरमेंट का समय नजदीक आ गया है, इसलिए वो जंगल में घूम रहे हैं. राउत के इस बयान से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. वहीं बीजेपी के नेताओं ने राउत के इस बयान पर विरोध जताया है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय दौरे पर गुजरात पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने गिर वन्यजीव अभ्यारण्य और वनतारा जैसे जगहों पर जाकर जानवरों के साथ कुछ समय बिताया. उन्होंने अपने इस दौरे की कुछ तस्वीरें और वीडियो भी शेयर किया था. जिसके बाद विपक्षी नेता राउत ने तंज कसा है. 

विपक्षी दलों के नेता ने बोला हमला

पीएम मोदी 3 मार्च को गुजरात के गिर वन्यजीव अभयारण्य दौरे पर पहुंचे थे. जहां उन्होंने जंगल सफारी का आनंद लिया. सोशल मीडिया पर शेयर की गई तस्वीरों में पीएम मोदी एशियाई शेरों के पास नजर आ रहे हैं. इस दौरान उन्होंने वन्यजीव को संरक्षित करने और उनसे जुड़े कई मुद्दों पर बात की. इस दौरान केंद्रीय मंत्री और वन विभाग के सीनियर अधिकारी साथ मौजूद रहें. अब पीएम मोदी के इस दौरे के बाद विपक्षी नेता संजय राउत ने निशाना साधा है. विपक्षी दलों के नेताओं का आरोप है कि देश में चल रहे गंभीर मुद्दों के बीच पीएम मोदी जंगल सफारी घूम रहे हैं. ये कहां से सही है? हालांकि बीजेपी के नेताओं का कहना है कि वन्यजीवों की सुरक्षा और विलुप्त हो रहे जीवों को भारत में वापस बसाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुत बड़ा योगदान है. 

वन्य जीवों को संरक्षित करने की कोशिश

पीएम मोदी वनतारा में उन पशुओं के साथ भी नजर आएं, जिनका इलाज किया जा रहा था. वहीं इस दौरे के दौरान की उनकी एक तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें प्रधानमंत्री शेर के बच्चों को दूध पिलाते नजर आ रहे हैं. वहीं कुछ शावक उनके अगल-बगल खेलते नजर आ रहे हैं. पीएम मोदी ने भारत से विलुप्त हो चुके चीता को वापस भारत में बसाने के लिए काफी मेहनत की. उन्होंने अपने जन्मदिन के मौके पर मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीता को वापस लाया था, हालांकि उसके बाद और भी कई खेप चीता भारत आ चुके हैं. उनमें से कुछ ने दम तोड़ दिया. लेकिन कुछ चीता अब भारत के रंग में पूरी तरह से रंग चुके हैं. 
 

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