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Ramesh Bidhuri Remark: क्या है लोकसभा के नियम जिसके चलते मुसीबत में पड़ सकते हैं रमेश बिधूड़ी, जाने संसद में गलत बयान देने पर क्या मिलती है सजा

Ramesh Bidhuri Remark: 21 सितंबर को 5 दिवसीय विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में भाजपा नेता रमेश बिधूड़ी ने ऐसा बयान दिया जो भारतीय संसदीय इतिहास में शायद ही कभी देखने को मिलेगी. भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी की संसद में टिप्पणी से राजनीतिक गलियारों का माहौल गरमा गया है. दरअसल, 18 सितंबर से शुरू हुए […]

Calendar Last Updated : 25 September 2023, 11:44 AM IST
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Ramesh Bidhuri Remark: 21 सितंबर को 5 दिवसीय विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में भाजपा नेता रमेश बिधूड़ी ने ऐसा बयान दिया जो भारतीय संसदीय इतिहास में शायद ही कभी देखने को मिलेगी. भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी की संसद में टिप्पणी से राजनीतिक गलियारों का माहौल गरमा गया है.

दरअसल, 18 सितंबर से शुरू हुए संसद के पांच दिवसीय विशेष सत्र के दौरान उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के एमपी दानिश अली को लेकर असंसदीय भाषा का उपयोग किया. उनके इस बयान के बाद विपक्षी लगातार उनके इस्तीफे और संसद से निलंबित किए जाने की मांग कर रहे हैं. वहीं बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर मामले की जांच करने मांग की है.  निशिकांत दुबे ने अपनी मांग में कहा है कि, संसद में दानिश अली ने रमेश बिधूड़ी को इतना उकसाया कि वह ऐसी भाषा बोलने पर विवश हो गए.

वहीं दानिश अली ने भी लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी लिखी है जिसमें उन्होंने बिधूड़ी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है. उन्होंने चिट्ठी में लिखा है, मेरे लिए भड़वा, कटवा, मुल्ला उग्रवादी और आतंकवादी जैसे शब्द का इस्तेमाल किया गया है. हालांकि लोकसभा स्पीकर ने बिधूड़ी के इन शब्दों को कार्रवाई से हटा लिया है. लेकिन इसको लेकर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है. दानिश अली ने कहा कि, मानसून सत्र के दौरान सरकार ने विपक्ष के नेता को छोटी सी बात के लिए निलंबित कर दिया था जबकि बिधूड़ी ने गालियां दी है.

संसद में अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने पर क्या कार्रवाई होती है-

संविधान के आर्टिकल 105 के अनुसार संसद में कही गई किसी भी बात को कोर्ट में चैलेंज नहीं किया जा सकता है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि संसद में आपत्तिजनक टिप्पणी करने की छूट है. संसद में एक सांसद जो भी कुछ बोलता है वो लोकसभा में प्रोसीजर एंड कंडक्ट ऑफ बिजनेस के रूल 380 के तहत स्पीकर के कंट्रोल में होता है. यानी अगर कोई संसद में असंसदीय भाषा का इस्तेमाल करता है तो उस पर स्पीकर को ही कार्रवाई करने का अधिकार होता है. रुल 373 के अनुसार अगर कोई सांसद किसी सदस्य के आचरण पर अभद्र टिप्पणी करता है तो उसे तुरंत सदन से हटाने का निर्देश स्पीकर दे सकते हैं.

लोकसभा स्पीकर के पास क्या-क्या अधिकार होता है-

आपको बता दें कि, जिस लोकसभा की कार्यवाही आप टीवी पर देखते हैं उसके लिए एक रुल बुक बनाया गया है. इसी रूल बुक के जरिए सदन को चलाया जाता है. रुल बुक 373 के अनुसार अगर कोई लोकसभा स्पीकर को लगत है कि कोई सांसद बार-बार सदन की कार्रवाई को बाधित कर रहा है तो वह उसे उस दिन की कार्रवाई से सदन से बाहर कर सकते हैं. या फिर चाहे तो बाकी बचे पूरे सेशन से भी निलंबित कर सकते हैं.

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