Retail Investors: भारतीय बाजार में रिटेल इन्वेस्टर्स में अपनी पूंजी लगाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही हैं. वहीं इनके इन्वेस्टर्स का हाल ऐसा हुआ कि, वे बहुत अधिक रिस्की माने जाने वाले डेरिवेटिव सेगमेंट में भी लोग अधिक एक्टिव दिखाई दे रहे हैं. वहीं बाजार में नियामक सेबी की हमेशा वॉर्निंग का भी खास असर नहीं दिख रहा है. यही वजह है कि, रिटेल इन्वेस्टर्स ने डेरिवेटिव सेगमेंट में बीते महीने एक नया रिकॉर्ड बनाया है.
मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के बड़े स्टॉक एक्सचेंज एनएसई पर डेरिवेटिव में ट्रेडिंग होने वाले रिटेल पार्टिसिपेन्ट की संख्या अगस्त महीने में रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ोत्तरी हुई है. वहीं जीरो-डे ऑप्शंस रिटेल इन्वेस्टर्स के मध्य अधिक लोकप्रिय हैं. जबकि इन ऑप्शंस की खाश बात ये है कि, उनकी एक्सपायरी डेट हर दिन होती है. इसके साथ ही उनकी कॉस्ट भी तुलनात्मक तौर पर कम दर्ज की जाती है. यदपि डेरिवेटिव सेगमेंट के अंदर रिटेल इन्वेस्टर्स की भागीदारी को रिकॉर्ड स्तर पर ऊंचा पहुंचाने में जीरो-डे ऑप्शंस की बढ़ती लोकप्रियता का अहम योगदान रहा है.
वहीं सामने आई रिपोर्ट के अनुसार एनएसई के डेटा में बताया गया कि, बीते जुलाई महीने के दरमियान सप्ताह के पांच में से चार दिन मुख्य तरीके से इंडेक्स ऑप्शन में ट्रेड करने वाले रिटेल इन्वेस्टर की संख्या 3.7 मिलियन थी. ये 2022 से 2023 के एक महीने एवरेज 2.8 मिलियन की तुलना में अधिक अच्छा माना जाता है. जिसके उपरांत अगस्त माह में इस तरह के इन्वेस्टर्स की संख्या में बढ़ोत्तरी होकर 4 मिलियन तक पहुंच गई है. जो कि एक नया रिकॉर्ड है.
जीरो-डे ऑप्शंस बाजार में खुदरा निवेशकों के लिए नई पसंद सामने आई है. एनएसई पर बहुत पहले से ये ऑप्शन कांट्रैक्ट उपलब्ध हैं. इनकी बढ़ती मांग को देखते हुए बीएसई ने भी इसकी शुरुआत कर दी है. बीएसई ने इसी वर्ष मई माह में सप्ताह के हर दिन एक्सपायर हो जाने वाले सेंसेक्स ऑप्शन शुरू की है.
आपको बता दें कि रिटेल इन्वेस्टर सबसे अधिक डेरिवेटिव ट्रेडिंग में ही घाटा सहती हैं. जबकि सेबी के आंकड़े ये बताते हैं कि, फ्यूचर एंड ऑप्शंस सेगमेंट में ट्रेड करने होने वाले प्रत्येक दस में से नौ रिटेल इन्वेस्टर को नुकसान ही होता है. जबकि ऐसे इन्वेस्टर्स की औसत हानि 50 हजार रुपये तक की होती है.