SC on Lokpal: सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को लोकपाल के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें लोकपाल द्वारा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की जांच करने का अधिकार होने का दावा किया गया था. साथ ही SC ने इस पूरे घटनाक्रम को डिस्टर्बिंग यानी परेशान करने वाला करार दिया है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, लोकपाल कार्यालय और भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल के समक्ष शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया है.
यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब लोकपाल ने एक वर्तमान अतिरिक्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश के खिलाफ दायर दो शिकायतों पर यह आदेश पारित कर दिया था. इस शिकायत में यह आरोप लगाया गया था कि संबंधित जज ने एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश और उच्च न्यायालय के एक अन्य न्यायाधीश को प्रभावित किया है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आरोप में एक निजी कंपनी ने शिकायतकर्ता के खिलाफ मुकदमा दायर किया था. जिसमें कहा गया कि हाई कोर्ट के जज जब बार में वकील थे, तब यह कंपनी उनकी ग्राहक थी. शिकायत में आरोप लगाया गया कि उक्त न्यायाधीश ने मामले को प्रभावित कर कंपनी को लाभ पहुंचाने की कोशिश की. इस मामले में लोकपाल ने आदेश में निर्देश दिया था कि इस मामले से जुड़ी शिकायतें और प्रासंगिक सामग्री भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के कार्यालय को विचारार्थ भेजी जाएं.
लोकपाल ने आदेश जारी करते हुए कहा था कि हम यह स्पष्ट करते हैं कि इस आदेश द्वारा हमने केवल एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि क्या हाई कोर्ट के न्यायाधीश संसद द्वारा बनाए गए 2013 के लोकपाल अधिनियम की धारा 14 के तहत आते हैं? इसका उत्तर हमने सकारात्मक दिया है. हमने आरोपों की योग्यता पर विचार नहीं किया है या कोई जांच नहीं की है.अब सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर चार सप्ताह तक रोक लगाई है. साथ ही उच्चतम न्यायालय ने इसे गंभीर संवैधानिक और न्यायिक स्वायत्तता से जुड़ा मामला बताया है. इसके साथ ही SC ने केंद्र सरकार, लोकपाल कार्यालय और शिकायतकर्ता से जवाब मांगा है.
लोकपाल अधिनियम 2013 के धारा 14 में उन लोक सेवकों की परिभाषा दी गई है. जिन पर लोकपाल के अधिकार क्षेत्र में कार्रवाई हो सकती है. इस आदेश में लोकपाल का तर्क था कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश भी इस अधिनियम के तहत आते हैं. जिसके बाद यह मामला विवादों में आ गया. अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट विस्तृत सुनवाई करेगा, जिसके बाद यह तय होगा कि लोकपाल को उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की जांच का अधिकार है या नहीं. इस पर फैसला आने के बाद भारत की संवैधानिक न्यायिक स्वतंत्रता पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है.