काशी में महाशिवरात्रि के अगले दिन निकलेगी शिव बारात, कांग्रेस ने बोला परंपरा से खिलवाड़

वाराणसी (उप्र) :  वाराणसी में महाशिवरात्रि के दिन हर साल निकाली जाने वाली शिव बारात इस बार महाकुंभ से आ रही भारी भीड़ के कारण 27 फरवरी को निकाली जाएगी, यानी महाशिवरात्रि के अगले दिन. यह निर्णय वाराणसी में पिछले 42 सालों से लगातार आयोजित होने वाली शिव बारात समिति ने लिया है. 

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Courtesy: social media

वाराणसी (उप्र) :  वाराणसी में महाशिवरात्रि के दिन हर साल निकाली जाने वाली शिव बारात इस बार महाकुंभ से आ रही भारी भीड़ के कारण 27 फरवरी को निकाली जाएगी, यानी महाशिवरात्रि के अगले दिन. यह निर्णय वाराणसी में पिछले 42 सालों से लगातार आयोजित होने वाली शिव बारात समिति ने लिया है. 

समिति के एक सदस्य ने मंगलवार को इस बदलाव की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि महाकुंभ के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहते हैं, जिससे बारात के आयोजन में दिक्कतें आ सकती हैं. इसलिए, प्रशासन की सलाह के बाद शिव बारात को शिवरात्रि के दूसरे दिन निकालने का निर्णय लिया गया है. 

42 वर्षों से महाशिवरात्रि के दिन निकलती हैं बारात

शिव बारात समिति के मंत्री कमल कुमार सिंह ने कहा, "महाकुंभ के दौरान भारी भीड़ के मद्देनज़र प्रशासन ने शिव बारात को शिवरात्रि के दिन न निकालने की सिफारिश की थी. फिर हमने प्रस्ताव दिया कि इसे दूसरे दिन यानी 27 फरवरी को निकाला जाए, और प्रशासन भी इस बदलाव पर सहमत हो गया." 

यह पहली बार है, जब महाकुंभ के कारण शिव बारात को महाशिवरात्रि के बाद निकाला जाएगा. शिव बारात समिति पिछले 42 वर्षों से हर साल महाशिवरात्रि के दिन इस आयोजन का आयोजन करती आई है, लेकिन इस बार की स्थिति अलग है. 

कांग्रेस ने इसे परंपरा से खिलवाड़ बताया

कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मंत्री अजय राय ने इस निर्णय पर असंतोष व्यक्त किया है. उन्होंने इसे काशी की मूल परंपरा से खिलवाड़ करार दिया. राय ने कहा, "काशी की पहचान उसकी पुरानी परंपराओं और आस्थाओं से है. महाशिवरात्रि पर निकलने वाली शिव बारात के आयोजन में बदलाव काशी की सांस्कृतिक धरोहर से खिलवाड़ है."  

राय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि वह काशी की इस महत्वपूर्ण परंपरा के खिलाफ प्रशासन के इस कदम में हस्तक्षेप करें. उन्होंने कहा, "महाशिवरात्रि के दिन शिव बारात नहीं निकालना, यह पूरी तरह से काशी की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के साथ अन्याय है."

राय ने यह भी बताया कि शिव बारात पारंपरिक मार्ग से यात्रा करती है, जिसमें महामृत्युंजय मंदिर, दारानगर, मैदागिन, बुलानाला चौक, बाबा धाम गोदौलिया और चितरंजन पार्क जैसे प्रमुख स्थल शामिल हैं. यह परंपरा काशीवासियों के दिलों में बसी हुई है और इसका आयोजन हर साल श्रद्धा और उल्लास के साथ किया जाता है. 

काशी की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा जरूरी

अजय राय ने आगे कहा, "काशी की पुरानी सभ्यता और परंपराओं का महत्व वैश्विक स्तर पर है. यह परंपराएं काशीवासियों के लिए श्रद्धा और आस्था का प्रतीक हैं. सरकार को इसे खत्म नहीं करना चाहिए." उन्होंने इस मुद्दे पर भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि काशी की परंपराओं को तोड़ने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए.  

राय ने यह भी जोड़ा कि "अगर शादी के बाद बारात न निकाली जाए तो यह वैवाहिक परंपरा के साथ खिलवाड़ है. वैसे ही महाशिवरात्रि के दिन शिव बारात का आयोजन न करना काशी के धार्मिक परंपरा के खिलाफ है."

  

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