नई दिल्ली : केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को बताया कि उन्होंने पिछले चार वर्षों में 4,500 से अधिक पौधे लगाए हैं. इस मौके पर उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने जन्मदिन, वर्षगांठ जैसे खास अवसरों पर पेड़ लगाकर पर्यावरण को बचाने में योगदान दें.
चौहान ने कहा, "आज मैंने पौधे लगाने के चार साल पूरे कर लिए हैं... और इस दौरान यह शपथ जन आंदोलन में बदल रही है."
एक रोपा गया पौधा
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) February 19, 2025
विशाल वृक्ष बन जाता है।
जीवन देता है, जीना सिखाता है।
वृक्ष गुरु है, सखा है, पालनकर्ता है।
प्रतिदिन पौधारोपण के संकल्प को चार साल पूरे हुए,
यही प्रार्थना है कि ये कार्य जीवनपर्यंत सिद्ध होता रहे,
हाथ से हाथ मिलते रहें,
लोग जुड़ते रहें… pic.twitter.com/NaFEyurjqb
उन्होंने आगे कहा, "पर्यावरण की रक्षा, मिट्टी के कटाव को रोकना, और जल तथा जीवन को बचाना बहुत जरूरी है. पेड़ लगाना इन सभी उद्देश्यों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण है." उन्होंने इस आंदोलन को जन आंदोलन बनाने की दिशा में एक कदम और बढ़ाते हुए कहा, "पर्यावरण बचाने, मिट्टी के कटाव को रोकने, पानी और जीवन को बचाने के लिए पेड़ लगाना बेहद महत्वपूर्ण है."
इस अभियान के दौरान चौहान ने यह भी बताया कि उनका उद्देश्य सिर्फ पौधारोपण नहीं, बल्कि इसे एक जन जागरूकता अभियान में बदलना है, ताकि सभी लोग पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभा सकें. उन्होंने पेड़ लगाने को एक संस्कार के रूप में देखने की आवश्यकता जताई, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और हरियाली से भरपूर वातावरण छोड़ सके.
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 19 फरवरी 2021 को अमरकंटक में प्रतिदिन पौधारोपण का संकल्प लिया था. इस अवसर पर उन्होंने अपनी पत्नी साधना सिंह चौहान के साथ मिलकर पहला पौधारोपण किया. यह संकल्प शिवराज सिंह ने माँ नर्मदा के तट पर लिया, जहाँ उन्होंने पर्यावरण को बचाने और हरियाली बढ़ाने के लिए हर दिन एक पौधा लगाने की ठानी.
शिवराज सिंह चौहान ने इस अभियान की शुरुआत के पीछे की कहानी भी साझा की। उन्होंने बताया, "जब मैं मुख्यमंत्री था और पर्यावरण पर भाषण देता था, तब मुझे महसूस हुआ कि केवल शब्दों से काम नहीं चलेगा. मैं खुद को इस मामले में जिम्मेदार मानते हुए सोचने लगा कि पर्यावरण बचाने के कई तरीके हैं, लेकिन उनमें से एक बहुत आसान और प्रभावी तरीका है – पौधे लगाना. जब तक पेड़ कटने की अत्यंत आवश्यकता न हो, तब तक उन्हें काटना नहीं चाहिए."
उन्होंने आगे कहा, "मैंने यह तय किया कि जब तक खुद पौधे नहीं लगाऊंगा, तब तक दूसरों को इस बारे में कहने का कोई अधिकार नहीं होगा. इसलिए, 19 फरवरी 2021 को नर्मदा जयंती के दिन मैंने पौधारोपण का संकल्प लिया."