नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र और राज्यों को देश में एचआईवी मरीजों के इलाज के लिए उपयोग की जाने वाली एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरवी) दवाओं की गुणवत्ता और आपूर्ति के मुद्दे पर जवाब देने का निर्देश दिया है. यह मामला एक गैर-सरकारी संगठन नेटवर्क ऑफ पीपल लिविंग विद एचआईवी/एड्स और अन्य द्वारा दायर की गई याचिका से संबंधित है.
याचिका में याचिकाकर्ताओं ने एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी दवाओं की आपूर्ति और उनकी गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है. याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि अब तक केवल चार राज्यों ने उनके द्वारा दायर हलफनामे पर प्रतिक्रिया दी है. हलफनामे में दवाओं की खरीद प्रक्रिया और उनकी गुणवत्ता से संबंधित मुद्दों पर प्रकाश डाला गया था.
न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्यों को इस संबंध में अपनी प्रतिक्रिया दायर करने का निर्देश दिया. पीठ ने कहा, "सभी राज्यों को अपनी प्रतिक्रियाएं दायर करने का अवसर दिया जाए."
केंद्र ने पिछले साल जुलाई में उच्चतम न्यायालय को सूचित किया था कि सरकार **राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम** के तहत एआरवी थेरेपी केंद्रों के माध्यम से एचआईवी मरीजों को मुफ्त दवाइयाँ उपलब्ध करा रही है.
इस मामले में अगली सुनवाई 'चार अप्रैल' को होगी, जब केंद्र और राज्य सरकारों से इस मुद्दे पर और अधिक जानकारी मांगी जाएगी.
यह मामला देशभर में एचआईवी मरीजों के इलाज के लिए आवश्यक दवाओं की आपूर्ति और गुणवत्ता से जुड़ा हुआ है, जिससे मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके. उच्चतम न्यायालय द्वारा केंद्र और राज्यों को दिए गए निर्देश से यह संकेत मिलता है कि इस मुद्दे पर सरकारों से जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी.