Bihar Loksabha Election: बिहार में महागठबंधन सरकार को चुनौती देने के लिए पार्टी ने पार्टी पदाधिकारियों के जरिए बीजेपी कार्यकर्ताओं को नए सिरे से सक्रिय करने की तैयारी शुरू कर दी है. इसी क्रम में लोकसभा चुनाव प्रचार को गति देने के लिए 30 दिसंबर को पार्टी प्रदेश मुख्यालय पर बैठक बुलाई गई है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में सभी प्रदेश पदाधिकारी, सभी जिला अध्यक्ष, लोकसभा प्रभारी और लोकसभा संयोजक को आमंत्रित किया गया है.
संभव है कि बैठक में सम्राट चौधरी संगठनात्मक गतिविधियों को जमीन पर उतारने के लिए शीर्ष नेतृत्व द्वारा दिए गए निर्देशों को लागू करने की रणनीति साझा करेंगे. बैठक को प्रदेश संगठन महासचिव भीखू भाई दलसानिया और क्षेत्रीय संगठन महासचिव नागेंद्र नाथ संबोधित करेंगे. संभावना है कि इस बैठक में केंद्रीय नेतृत्व के खास प्रतिनिधि भी शामिल होंगे. हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि कौन आएगा. पार्टी की योजना राज्य से लेकर जिला और मंडल स्तर तक पार्टी पदाधिकारियों और जन प्रतिनिधियों को सक्रिय करने की है. बैठक में आगामी संगठनात्मक कार्यक्रमों और गतिविधियों पर भी मंथन प्रस्तावित है.
वहीं, बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. भीम सिंह ने जननायक की जयंती पर प्रस्तावित सम्मेलन को स्थगित किये जाने को जेडीयू का अशोभनीय और निंदनीय कृत्य बताया है. उन्होंने कहा कि सर्दी के मौसम का हवाला देना पूरी तरह से हास्यास्पद है, क्योंकि कर्पूरी जयंती पर मौसम पहली बार ऐसा नहीं है. यह वर्ष उनकी जन्मशती है.
ऐसे में सरकार को इस बार राज्य भर में कर्पूरी की याद में सिलसिलेवार समारोह आयोजित करने चाहिए थे. उन्होंने राज्यपाल की अध्यक्षता में सर्वदलीय आयोजन समिति बनाकर कर्पूरी ठाकुर की जन्म शताब्दी धूमधाम से मनाने की मांग की.
दरअसल, पिछले लोकसभा चुनाव में जेडीयू, बीजेपी और एलजेपी ने मिलकर चुनाव लड़ा था. इसमें जदयू के 16 प्रत्याशी विजयी रहे. एलजेपी के छह उम्मीदवार चुनाव जीते थे. पिछले चुनाव में एनडीए को 40 में से 39 सीटों पर जीत मिली थी, एक सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार जीते थे. ऐसे में बीजेपी की नजर उन 17 संसदीय क्षेत्रों पर है, जिन पर विरोधियों का कब्जा है.
एनडीए में एलजेपी (रामविलास), राष्ट्रीय एलजेपी, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक जनता दल शामिल हैं. ऐसे में कहा जा रहा है कि इस बार बीजेपी किसी भी हालत में अपने सहयोगियों के लिए ज्यादा सीटें नहीं छोड़ेगी. ऐसे में बीजेपी बिहार में अपने विरोधियों के लिए मजबूत किलेबंदी करने की तैयारी में है.