Waqf Amendment Bill: वक्फ (संशोधन) विधेयक को राज्यसभा में 3-4 अप्रैल की रात तीखी बहस के बाद पारित कर दिया गया. वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में बदलाव का प्रस्ताव करने वाले इस विधेयक को 128 वोट 'पक्ष' (हां) और 95 'विरुद्ध' (नहीं) के साथ पारित किया गया.
सरकार ने इसका नाम बदलकर एकीकृत वक्फ प्रबंधन सशक्तीकरण, दक्षता और विकास (यूएमईईडी) विधेयक रखने का भी प्रस्ताव रखा. राज्यसभा से पहले लोकसभा से 288 मतों के साथ इसे पास कर दिया गया था. इसी के साथ अब यह विधेयक कानून का रुप लेने के लिए तैयार है.
केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को राज्यसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून मुसलमानों के खिलाफ नहीं है या उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं रखता है, बल्कि इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के कामकाज में सुधार करना, जटिलताओं को दूर करना, पारदर्शिता सुनिश्चित करना और प्रौद्योगिकी-संचालित प्रबंधन शुरू करना है. लोकसभा ने गुरुवार को करीब 12 घंटे की तीखी बहस के बाद 288-232 वोटों से विधेयक पारित कर दिया.
इससे पहले इसका संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) द्वारा जांच किया गया था. इसके बाद तैयार किए गए विधेयक को उच्च सदन में पेश किया गया. जिसमें रिजिजू ने कहा कि प्रस्तावित कानून का धर्म से कोई लिंक नहीं है, यह केवल संपत्तियों से जुड़ा हुआ है. रिजिजू ने कहा कि विधेयक का उद्देश्य सभी मुस्लिम संप्रदायों को वक्फ बोर्ड में शामिल करना है.
मंत्री ने सदन को बताया कि 2004 में 4.9 लाख वक्फ संपत्तियां थीं, जो अब बढ़कर 8.72 लाख हो गई हैं. विधेयक पारित करने के लिए विपक्ष का समर्थन मांगते हुए रिजिजू ने कहा कि इसका उद्देश्य पिछली सरकारों के अधूरे कार्यों को पूरा करना है. उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा और रेलवे के स्वामित्व वाली संपत्तियों को छोड़कर, देश में सबसे ज्यादा संपत्ति वक्फ के पास है.
विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए रिजिजू ने कहा कि हम किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहते. वक्फ बोर्ड की स्थापना केवल वक्फ संपत्तियों की देखरेख करने के लिए की गई है, न कि उनका प्रबंधन करने के लिए. उन्होंने कहा कि सरकार ने अच्छे इरादे से विधेयक पेश किया है और इसलिए इसका नाम बदलकर 'उम्मीद' रखा गया है. इस नाम से किसी को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए.