प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों असम के दौरे पर हैं और गुवाहाटी में आयोजित ‘झुमोइर बिनंदिनी’ कार्यक्रम में भाग लिया. असम के इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने चाय बगानों की महक और उनकी सुंदरता का जिक्र करते हुए कहा कि चाय की असली खुशबू को एक चाय वाले से बेहतर कोई नहीं समझ सकता.
गुवाहाटी के सरुसजाई स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री ने वहां के उत्साह और उमंग से भरे वातावरण को महसूस किया. यहां के झूमर नृत्य के कलाकारों की मेहनत साफ दिखाई दे रही है. इस जबरदस्त उत्सव में चाय बगानों की खुशबू और उनकी सुंदरता भी महसूस हो रही है. चाय की खुशबू को एक चाय वाले से ज्यादा कौन जान सकता है?"
पीएम मोदी ने असमिया को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की अहम बात साझा की. उन्होंने बताया कि असम के लोग दशकों से इस सम्मान का इंतजार कर रहे थे, और यह सरकार की बड़ी उपलब्धि है. साथ ही उन्होंने कहा, "मैं असम के काजीरंगा में रुकने वाला पहला प्रधानमंत्री हूं, और दुनिया को इसकी जैव विविधता से परिचित कराया है."
PM Shri @narendramodi attends the Jhumoir Binandini programme in Guwahati, Assam. https://t.co/YCzuEpaYVP
— BJP (@BJP4India) February 24, 2025
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि असम के चराईदेव मोइदम को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है. उन्होंने इस उपलब्धि के लिए भाजपा सरकार की कड़ी मेहनत को श्रेय दिया और कहा कि यह असम के लिए गर्व की बात है.
चाय श्रमिकों की आय सुधारने के लिए प्रधानमंत्री ने असम चाय निगम के कर्मचारियों के लिए बोनस की घोषणा की. खासकर, चाय बागानों में काम करने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए ₹15,000 की आर्थिक मदद देने की योजना शुरू की गई है. यह कदम गर्भवती महिलाओं को विशेष सहायता प्रदान करेगा जो अक्सर अपनी स्थिति के कारण कई चुनौतियों का सामना करती हैं.
असम दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने चाय बागान समुदाय के पारंपरिक ढोल धोमसा को भी बजाया. इस खास मौके का वीडियो असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी के साथ अन्य लोग भी इस पारंपरिक संगीत का आनंद लेते नजर आए.