वफ़ा तुझ से ऐ बेवफ़ा चाहता हूँ..पढ़ें हसरत मोहानी के शेर..
रात दिन आँसू बहाना
चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है, हम को अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है
अक्सर याद आते हैं
नहीं आती तो याद उन की महीनों तक नहीं आती, मगर जब याद आते हैं तो अक्सर याद आते हैं
ठिकाना याद है
चोरी चोरी हम से तुम आ कर मिले थे जिस जगह, मुद्दतें गुज़रीं पर अब तक वो ठिकाना याद है
आरज़ू तेरी बरक़रार रहे
आरज़ू तेरी बरक़रार रहे, दिल का क्या है रहा रहा न रहा
इशारा कर दिया
तेरी महफ़िल से उठाता ग़ैर मुझ को क्या मजाल, देखता था मैं कि तू ने भी इशारा कर दिया
शर्मा के रह गए
आईने में वो देख रहे थे बहार-ए-हुस्न, आया मिरा ख़याल तो शर्मा के रह गए
तेरे सिवा है क्या
हम क्या करें अगर न तिरी आरज़ू करें, दुनिया में और भी कोई तेरे सिवा है क्या
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